“10 मिनट में मुंबई बंद” वाले बयान पर सियासी घमासान

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Political clash over Mumbai shutdown threat

संजय राउत के दावे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का तीखा पलटवार

Political clash over Mumbai shutdown threat
10 मिनट में मुंबई बंद- की धमकी पर राजनीतिक टकराव

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के एक बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। राउत ने दावा किया कि अगर जरूरत पड़ी तो मुंबई को 10 मिनट में बंद किया जा सकता है। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। खासतौर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बयान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे “खोखली धमकी” करार दिया और कहा कि अब ऐसे बयान सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए दिए जाते हैं, हकीकत से इनका कोई लेना-देना नहीं है।

यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक दल अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। मुंबई की सियासत हमेशा से महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करती रही है, ऐसे में इस तरह के बयान और उन पर प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक रूप से चर्चा के केंद्र में आ जाती हैं।

संजय राउत ने क्या कहा?

एक इंटरव्यू के दौरान संजय राउत ने दावा किया कि ठाकरे परिवार और शिवसेना की ताकत आज भी बरकरार है और अगर पार्टी चाहे तो मुंबई को कुछ ही मिनटों में ठप किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह मुंबई की जनता और मराठी मानुष के समर्थन की ताकत है, जिसे कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता।

राउत के बयान का सीधा संकेत यह था कि शिवसेना (UBT) के पास आज भी इतना जनाधार और संगठनात्मक क्षमता है कि वह मुंबई जैसे महानगर की रफ्तार को रोक सके। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह शक्ति दिखाने के लिए नहीं, बल्कि चेतावनी के रूप में समझी जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का पलटवार

संजय राउत के बयान पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि

“अब ऐसे बयान देने से कुछ नहीं होता। जब बालासाहेब ठाकरे जीवित थे, तब परिस्थितियां अलग थीं। आज किसी में इतना दम नहीं है कि मुंबई को 10 मिनट में बंद कर सके।”

फडणवीस ने कहा कि यह बयान राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले भी इसी तरह की धमकियां दी गई थीं, लेकिन वे जमीन पर कभी सच साबित नहीं हुईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबई आज एक आधुनिक, बहुसांस्कृतिक और कानून के दायरे में चलने वाला महानगर है, जिसे डराने-धमकाने की राजनीति से नहीं चलाया जा सकता।

“बालासाहेब ठाकरे का दौर अलग था”

देवेंद्र फडणवीस ने अपने बयान में बालासाहेब ठाकरे का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय शिवसेना की पकड़ और प्रभाव बिल्कुल अलग स्तर पर था। बालासाहेब ठाकरे की एक अपील पर मुंबई की रफ्तार थम जाती थी, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं।

उन्होंने कहा कि

  • आज मुंबई में कानून का शासन है
  • पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सक्षम है
  • किसी भी तरह की अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

फडणवीस के अनुसार, पुराने दौर की राजनीति को आज के समय में दोहराने की कोशिश सिर्फ राजनीतिक भ्रम पैदा कर सकती है, लेकिन इससे वास्तविक ताकत साबित नहीं होती।

एकनाथ शिंदे का उदाहरण

मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस मौके पर एकनाथ शिंदे प्रकरण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब शिंदे ने शिवसेना से अलग होकर बगावत की थी, तब भी राउत और उनके समर्थकों ने धमकी दी थी कि शिंदे मुंबई में कदम नहीं रख पाएंगे।
लेकिन हकीकत यह रही कि

  • एकनाथ शिंदे मुंबई आए
  • बहुमत के साथ सरकार बनाई
  • आज वे राज्य के महत्वपूर्ण नेताओं में शामिल हैं

फडणवीस ने कहा कि इससे साफ है कि धमकियों और दावों की राजनीति अब असरदार नहीं रही

मुंबई: सिर्फ एक शहर नहीं, देश की आर्थिक राजधानी

मुंबई सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आर्थिक राजधानी मानी जाती है। यहां देश-विदेश की बड़ी कंपनियां, शेयर बाजार, फिल्म इंडस्ट्री और करोड़ों लोगों का रोज़गार जुड़ा हुआ है। ऐसे में “मुंबई बंद” जैसे बयान न सिर्फ राजनीतिक बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी संवेदनशील माने जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान

  • निवेशकों में गलत संदेश भेजते हैं
  • आम जनता में असुरक्षा की भावना पैदा कर सकते हैं
  • शहर की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं

इसी कारण सरकार इस तरह के बयानों पर सख्त प्रतिक्रिया देती है।

BMC चुनाव और सियासी रणनीति

इस पूरे विवाद को BMC चुनाव 2026 से जोड़कर देखा जा रहा है। मुंबई महानगरपालिका देश की सबसे अमीर नगरपालिकाओं में से एक है और उस पर नियंत्रण राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम माना जाता है।

  • शिवसेना लंबे समय तक BMC पर काबिज रही है
  • सत्ता विभाजन के बाद शिवसेना (UBT) और शिंदे गुट के बीच सीधी लड़ाई है
  • बीजेपी भी इस बार पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है

ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “मुंबई बंद” जैसे बयान भावनात्मक मुद्दों को हवा देने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।

जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

  • कुछ लोगों ने राउत के बयान को पुरानी राजनीति की याद बताया
  • वहीं कई यूज़र्स ने कहा कि मुंबई को बंद करने की बात करना आम नागरिकों की रोज़ी-रोटी से खिलवाड़ है

कई लोगों का कहना है कि मुंबई की जनता अब विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की राजनीति चाहती है, न कि बंद और हड़ताल की।

विपक्ष बनाम सरकार: बयानबाजी का दौर

यह विवाद यह भी दिखाता है कि महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज होता जा रहा है। विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने के लिए तीखे बयान देता है, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था और स्थिरता का हवाला देकर पलटवार करती है।

देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि

“मुंबई सभी की है। यहां हर भाषा, हर समुदाय और हर नागरिक सुरक्षित है। किसी को भी डराने या शहर को ठप करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”

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